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10-01-2014, 12:07 AM   #21
Amany Ezzat
vip
Crown5
 
تاريخ التسجيل: Jan 2014
الدولة: مصر
المشاركات: 6,586

[] ذاك المساء، على حجر[/]
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[] كان كلُّ شيء في منتهى الرقة. العمَّالُ المتعبون،
ظلال الحمائم، الملابس على الحبال البعيدة.
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[] شعر أن حياته أيضًا كانت رقيقة معه ذاك المساء.
مشى معها إلى أقرب حجر، وقعد.
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[] تذكَّر آخر أغنية تعلِّمها في المدرسة،
ورقص مع الشارع مع حديد المحلات المقفلة،
وبلاطات الرصيف، التي كانت تخرج من طينها القديم وتبتسم.
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[] مشى مع القيثارات[/]
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[] التي رقصت معه كلَّ الليل حتى[/]
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[] أصبحَتْ ضلوعَه.[/]
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[] على شعره نسمة هواء.[/]
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[] في عينيه نجوم في عنقه عقد.[/]
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[] همَّ أن يقول لأحد قربه: هذا العقد هدية من عيد ميلادي.[/]
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[] لكنه التفت إلى الحجر الوحيد[/]
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[] لَمَسَهُ بلطف[/]
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[] وأغمض عينيه.[/]
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[] رفقة[/]
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[] كان لا يخرج إلاَّ في الأيام المشمسة ليكون له رفيق:[/]
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[] ظلُّه الذي يتبعه دائمًا.[/]
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[] ينظر وراءه ليتحدَّث إليه، ليبتسم له.[/]
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[] يلتفت بخفَّةٍ لئلا يغافله على دَرَج ويتسلَّل إلى بيت[/]
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[] يخبره حكايات مشوِّقة لئلا يضجر منه هذا [/]
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[] الظلّ ويهرب،[/]
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[] في الصباح يُعِدُّ كوبين من الحليب، على الغداء يُعِدُّ صحنين،[/]
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[] وكان يعود إلى بيته عند غياب الشمس[/]
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[] يقعد على حجر[/]
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[] ويبكي حتى الصباح.[/]
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[] الحشد[/]
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[] تلمَّس قماش المقعد وعرف أنه ليس وحده[/]
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[] أحسَّ بفرحٍ غريب وهمَّ أن يغنِّي،[/]
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[] لأوَّل مرة يشعر بجسد هذا المقعد،[/]
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[] بالأيدي التي صنعته وربما هي معه الآن،[/]
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[] بالمدينة التي جاء منها، بالحمَّالين الذين أوصلوه إلى الغرفة،[/]
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[] بالذين جلسوا عليه من عهد بعيد،[/]
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[] وها هم جميعهم، واحدًا بعد واحد،[/]
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[] يدخلون.[/]
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[] نظر إلى يديه، ثم إلى الحشد[/]
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[] فإلى المقعد بلومٍ شديد وخرج[/]
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[] صافقًا الباب وراءه.[/]
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[] المتعبون[/]
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[] المتعَبون يجلسون في الساحة[/]
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[] ينصتون إلى عبور النسمات، التي كانت في الأرجح بائعين متجوّلين[/]
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[] أو متسكّعين، فقدوا أقدامهم[/]
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[] للمتعبين ساحة[/]
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[] بلاطاتها، مع الأيام، اكتسبت صفات إنسانية[/]
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[] حتى أنها إذا غاب واحدٌ منهم[/]
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[] تبكي.[/]
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[] المتعبون في الساحة، وجوههم ترقُّ يومًا بعد يوم[/]
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[] وشَعرهم يلين[/]
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[] في هواء الليل و الأضواء الخفيفة،[/]
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[] وحين ينظرون إلى بعضهم ترقُّ عيونهم أيضًا[/]
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[] إلى درجة أنهم يظنون أنفسهم زجاجًا[/]
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[] وينكسرون.[/]
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[] الربيع أخضر، السماء زرقاء[/]
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[] لا يمكنه فعل شيء[/]
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[] الهرَّة وحدها تجلس قربه[/]
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[] يدغدغها، يداعب صوفها الناعم، يقول لها كلمة[/]
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[] لا تعني شيئًا ولكن فقط كي يسمع صوته.[/]
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[] شعاع ضعيف يدخل غرفته ويقعد على الكنبة[/]
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[] يبقى لحظة قرب ساقه، ثم يرحل[/]
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[] وبين وقت و آخر تنتابه هبَّات هواء[/]
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[] لا يعرف إن كان عليه أن يستعملها لقول شيء ما[/]
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[] أو للتنفُّس[/]
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[] العلامة الوحيدة للحياة في الخارج بقعةُ رطوبة صغيرة على الحائط[/]
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[] لكن، معه تبغ لهذا النهار[/]
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[] أيضًا صورة في محفظته يدخّن غليونًا[/]
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[] يمكنه أن يستعيض عن الحياة بالصور، وراح يغنِّي:[/]
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[] الربيع أخضر، السماء زرقاء[/]
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[] في الصباح تطلع الشمس في الليل يطلع القمر[/]
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[] الجهات أربع و الفصول أربعة[/]
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[] ومن الجهات والفصول تأتي الأرانب والرياح والغناء[/]
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[] وعلى التلَّة حجر، على التلَّة حجر.[/]
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[] ثم لمس هرَّته بحنان[/]
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[] داعب صوفها الناعم[/]
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[] وعاد إلى النوم.[/]
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